नाड़ी दोष परिहार पूजा अनुष्ठान

नाड़ी भौतिक, मानसिक तथा स्वास्थ का सूचक माना जाता है। नाड़ी दोष का विचार विशेष कर विवाह के समय, वर-वधु के जन्म कुण्डली मिलान के समय किया जाता है। ३६ गुण संख्या में से ८ गुण केवल नाड़ी से ही प्राप्त होता है। नाड़ी मिलान को परम आवश्यक माना जाता है। नाड़ी नहीं मिलने पर माना जाता है कि वर-वधु के जीवन में भौतिक सुख के साथ-साथ स्वास्थ्य संबधित परेशानियाँ उत्पन हो सकती है। कहीं कहीं तो ऐसा माना जाता है कि नाड़ी दोष मृत्यु का कारण भी बन जाता है लेकिन कितने विद्वान इस तथ्य को निराधार भी मानते हैं। नाड़ी को छोड़ कर बाकी सारे गुण मिल जाने पर इस पर विचार किया जा सकता है। अष्ट गुण मिलान में नाड़ी को काफी महत्व दिया जाता है। नाड़ी दोष के कारण एक दूसरे से सामंजस्य बैठने में, दिक्क्तों का सामना करना पर सकता है। दोनों के संबंध में अविश्वास की भावना आती रहती है। नाड़ी मिलान करते समय केवल नाड़ी पर ही ध्यान नहीं देना चाहिए बल्कि नाड़ी सहित सभी गुणों के साथ-साथ नक्षत्र, नाड़ी पद, नाड़ी दोष की क्षमता, आयु विचार तथा कई पहलु आदि पर भी ध्यान देना चाहिए। कई सारे ऐसे योग जन्म कुण्डली में रहते तथा बनते हैं, जो नाड़ी दोष को कमजोर बना देता है। आपके या आपके बच्चों के विवाह समय में अगर इस प्रकार का उलझन दिखाई दें तो दोनों तरफ के जन्म कुण्डली का अच्छे तरह से विश्लेषण अवश्य करा लेना चाहिए। अगर कुण्डली मिलान के बाद पूर्ण नाड़ी दोष बनता है, फिर भी किसी कारण बस अगर आगे बढ़ा जाता है तो किसी विद्वान आचर्यों के द्वारा नाड़ी दोष परिहार पूजा अनुष्ठान अवश्य करवा लेनी चाहिए। विशेष जानकारी के लिए आप हमसे संपर्क कर सकते हैं।

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